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| मुनव्वर राणा |
ये पगली फिर भी अब तक खुद को शहजादी बताती है,
कईं बातें मोहब्बत सबको बुनियादी बताती है,
जो परदादी बताती थी वही दादी बताती है,
जहाँ पिछले कईं वर्षों से काले नाग रहते हैं,
वहाँ एक घोंसला चिड़ियों का था दादी बताती है,
अभी तक ये इलाका है रवादारी के कब्ज़े में,
अभी फिरकापरस्ती कम है आबादी बताती है,
यहाँ वीरानियों कि एक मुद्दत से हुकूमत है,
यहाँ से नफरतें गुज़री है बर्बादी बताती है,
लहू कैसे बहाया जाये ये लीडर बताते हैं,
लहू का जायका कैसा है ये खादी बताती है,
गुलामी ने अभी तक मुल्क का पीछा नहीं छोड़ा,
हमें फिर कैद होना है ये आज़ादी बताती है,
गरीबी क्यूँ हमारे शहर से बाहर नहीं जाती,
अमीर-ऐ-शहर के घर की हर एक शादी बताती है,
मैं उन आँखों के महखाने में थोड़ी देर बैठा था,
मुझे दुनिया नशे का आज तक आदी बताती है.

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