Thursday, February 16, 2012

साड्डा हक, ऐथे रख - इरशाद कामिल

इरशाद कामिल
[ हिंदी फिल्म "रॉक्स्टार" (रिलीज तारीख 11-11-2011) से ]
तुम लोगों की, इस दुनिया में
हर कदम पे, इंसान ग़लत
मैं  सही समझ के जो भी कहूँ
तुम कहते हो ग़लत, मैं गलत हूँ फिर कौन सही कौन सही
मर्ज़ी से जीने की भी मैं
क्या तुम सबको मैं अर्जी दूं
मतलब कि तुम सबका मुझपे
मुझसे भी ज्यादा हक है

साड्डा हक, ऐथे रख... (8)
ना ना ना...
साड्डा हक, ऐथे रख... (4)

हे! इन गद्दारों में या उधारों में
तुम  मेरे जीने की आदत का क्यूँ घोंट रहे हो दम
बेसलीका मैं, उस गली का मैं
ना जिस में हया, ना जिस में शरम
मन बोले के रस में जीने का हरजाना दुनिया दुश्मन
सब बेगाना इन्हें आग लगाना
मन बोले मन बोले, मन से जीना या मर जाना

साड्डा हक, ऐथे रख... (8)
ना ना ना...

ओ  इको-फ्रेंडली, नेचर के रक्षक, मैं भी हूँ नेचर
रिवाजों से, समाजों से क्यूँ
तू काटे मुझे, क्यूँ बांटे मुझे इस तरह
क्यूँ सच का सबक सिखाए, जब सच सुन भी न पाए
सच कोई बोले तो तू, नियम क़ानून बताए
तेरा डर, तेरा प्यार, तेरी वाह, तू ही रख रख साला

साड्डा हक, ऐथे रख... (4)
ऐथे ऐथे रख
साड्डा हक, ऐथे रख... (8)

No comments:

Post a Comment